पैरालंपिक में देवेन्द्र झाझरिया की देशभक्ति

सबसे लंबी दूरी तक भाला फेंकने के बाद कौन नहीं चाहेगा कि वह अपने दोनों हाथों को उठाकर विजयी संदेश दे. लेकिन, ऐसा नहीं कर पाने का दर्द देवेन्द्र झाझरिया से पूछिए.

वैसे एक हाथ से ही सही, विक्ट्री सेलिब्रेशन का रोमांच महसूस करने वाले इस खिलाड़ी का अद्भुत एक्शन, कम से कम वीडियो में ही सही जरूर देखें.

ब्राज़ील में हुए रियो पैरालंपिक-2016 में जैवलिन थ्रो का रिकॉर्ड बनाकर देवेंद्र झाझरिया इमोशन और परिधि का क्या खूब संतुलन बनाते दिखते हैं.

ऐसा करते हुए उन्हें लाइव देखना आपको दुनिया के महानतम खिलाड़ियों का गेम देखने की बेहतरीन श्रेणी में खड़ा कर सकता था.

रियो पैरालंपिक में देवेन्द्र झाझरिया ने अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़कर पुरुष भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीता. देवेंद्र ने पैरालंपिक में भारत के लिये दो बार स्वर्ण पदक जीत कर इतिहास रचा है. इससे पहले 2004 में एथेंस में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था.

2008 और 2012 के खेलों में उन्होंने भाग नहीं लिया था. 36 वर्षीय देवेंद्र झाझरिया 2004 में अर्जुन पुरस्कार और 2012 में पद्मश्री प्राप्त करने वाले पहले एथलीट हैं.

यह दिलचस्प है कि साक्षी मलिक, पी.वी. सिंधु और दीपा करमाकर के रियो ओलंपिक में जलवे के बाद रियो में एक और मुकाबला हुआ जिसमें भारतीय खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया.

भारत ने रियो पैरालंपिक में 19 खिलाड़ी उतारे जिसमें मरियप्पन थंगावेलू और देवेंन्द्र झाझरिया ने स्वर्ण पदक जीत लिए. जबकि दीपा मलिक रजत और वरूण भाटी ने कांस्य पदक जीता. ये खिलाड़ी भी उतने ही बड़े खेल रत्न हैं.

शारीरिक रूप से विकलांग लोग मजबूत इच्छाशक्ति वाले होते हैं और यह हम अपने रोजाना के जीवन और कामकाज में देख सकते हैं. जरूरत इस बात की है कि हम उनके प्रयास की सराहना करें, उन्हें उचित स्थान दें और जीवन में आगे बढ़ने के उनके हौसले को रास्ता दें.

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