फिल्म समीक्षा: वक़्त (1965)

Waqt

क्यों कुछ ‘वक़्त’ परिवार के साथ समय की मह्त्वपूर्णता को दर्शाती इस फिल्म को देख कर व्यतीत किया जाए? रवि शंकर शर्मा के सदाबहार गीत ‘ऐ मेरी जोहराजबीं, तुझे मालूम नहीं’, ‘कौन आया कि निगाहों में चमक जाग उठी’ जैसे गीतों का लुत्फ़ उठाने के लिए ज़रूर देखें वक़्त.

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फिल्म समीक्षा: साहिब बीबी और ग़ुलाम

Sahib Biwi Aur Ghulam

ब्रिटिश राज में सामंतवाद के अंत, बेरोज़गारी के उत्थान और महिलाओं की स्थिति को दर्शाती 1962 में आई साहिब बीबी और ग़ुलाम हिन्दी सिनेमा की  कुछ उन चुंनिंदा फिल्मों में से है जिसकी महत्ता हर समय रहेगी.

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फिल्म समीक्षा: रंग बिरंगी

अपनी व्यस्तता में लोग भूल जाते हैं कि अपने घर एवं जीवनसाथी को समय देना कितना जरूरी है. हृषिकेश मुख़र्जी द्वारा निर्देशित रंग बिरंगी (1983) भी मुंबई में रह रहे ऐसे ही जोड़ों की कहानी है.

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एक श्रीमान एक श्रीमती

क्यों न अपने बच्चों  के साथ  बैठकर एक सिनेमा देखा जाए, एक ऐसा  पारिवारिक सिनेमा जो आपको पुराने ज़माने की याद दिलाए, और आपके बच्चो को हंसा कर तनाव मुक्त करे. हम बात कर रहे हैं अभिनेता शशि कपूर और अभिनेत्री बबिता कपूर द्वारा अभिनीत 1969  में प्रसारित सिनेमा एक श्रीमान एक श्रीमती की, जो आपको हंसा-हंसाकर साठ के दशक की प्रचलित कहानी से रूबरू कराएगी.

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फिल्म समीक्षा: महल

Madhubala in Mahal

हिन्दी सिनेमा की पहली हॉरर फिल्म. अशोक कुमार, मधुबाला, विजयलक्ष्मी द्वारा अभिनीत यह सिनेमा कहानी है हरीशंकर की जो इलाहाबाद में ख़रीदे अपने महल में रहने आता है, जिसके साथ एक भूतिया कहानी जुड़ी हुई है.

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