प्रगति मंच के जरिये नरेन्द्र मोदी की बातचीत

मुझे दो तरह के लोग पसंद नहीं – एक वो जो सरकार के खिलाफ कोर्ट के किसी भी फैसले को फौरन लोकतंत्र की जीत और सरकार के मुंह पर करारा तमाचा करार दे देते हैं. सरकार की किसी भी चूक या असफलता को “देखा, हमने कहा था ना” बताने लगते हैं. दूसरे वो जो हर बात को राष्ट्रप्रेम से जोड़ देते हैं. जिसने भी खिलाफ में कुछ कहा, फौरन उसकी जाति और धर्म का बही खाता निकाल लेते हैं. इंटरनेट की मनगढंत बातों को फारवर्ड कर करके अपने मोबाइल और लैपटॉप का की-बोर्ड खराब कर देते हैं.

इन सबके बीच कुछ अच्छी और रोचक जानकारियां दब जाती हैं, जैसे अभी-अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रगति मंच के जरिये अठारहवें दौर की बातचीत. प्रगति सक्रिय शासन और समय पर कार्यान्वयन के लिए सूचना व संचार तकनीक आधारित बहु-प्रारूपीय मंच है जहां विकास कार्यों का जायजा लिए जाने का दावा सरकार करती है.

हाल ही में हुई प्रगति की समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री ने रेलवे से संबंधित शिकायतों के निपटान और समाधान के दिशा में हुई प्रगति का अवलोकन किया. भ्रष्ट अधिकारियों से संबंधित शिकायतों को देखते हुए उन्होंने भ्रष्टचार के दोषी पाए जाने वाले रेवले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया. प्रधानमंत्री ने भारतीय रेलवे को सभी शिकायतों और पूछताछ के लिए एक एकीकृत एकल टेलीफोन नंबर के लिए काम करने को कहा, जिसमें दुर्घटना के मामले में हेल्पलाइन भी शामिल है.

प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा और नगालैंड सहित कई राज्यों में फैले रेलवे, सड़क और बिजली के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की.

बच्चों के टीकाकरण के लिए मिशन इंद्रधनुष की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री ने इस संबंध में 100 सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले जिलों के लिए निश्चित समय सीमा में लक्षित कर उन पर ध्यान देने के लिए कहा. साथ ही उन्होंने भारत सरकार के सभी सचिवों और राज्यों के सभी मुख्य सचिवों से ठोस योजनाओं और उद्देश्यों के साथ आगे आने के लिए कहा ताकि 2022 में स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ बदलाव के सभी लक्ष्यों को हासिल किया जा सके.

जरूरी नहीं कि आप भी सरकारी बाबू हों लेकिन स्वतंत्रता की इस ऐतिहासिक वर्षगांठ के लिए अपने स्तर से आप उन लोगों का मार्गदर्शन कर सकते हैं जो हर अच्छी बात को अपना या अपनी जाति और धर्म की उपलब्धि करार दे डालते हैं. वे फेसबुक और व्हासएप पर हिन्दू महिमा का गुणगान करते हैं, लेकिन मुस्लिम और ईसाई समाज के लोगों पर षड़यंत्रकारी होने का आरोप लगाते हैं. ऐसे हिन्दुओं को भी समझाएं जो अपने धर्म में हो रहे महिला अत्याचारों पर चुप्पी मार कर बैठे हैं मगर उन्हें बुर्का पहनने वाली महिलाओं के कष्टों से बड़ी सहानुभूति हो रही है.

भारत बोल रहा है