देश में स्वास्थ्य सम्बन्धी जागरूकता और तमाम देशों में ट्रैवल टूरिज्म क्षेत्र को खोलने की कवायद लोगों को अपने ट्रैवल प्लान बनाने के लिए उकसा रही है. लॉकडाउन लगभग सभी देशों में एहतियातों के साथ हटा दिया गया है या कुछ सावधानियों के साथ हल्का-फुल्का बरता जा रहा है. ऐसे में वीकेंड पर अपने शहर से बाहर जाने वाले व सैर-सपाटा को अपनी दिनचर्या का हिस्सा समझने वालों के अंदर छिपी घुम्मकड़ी कब तक थमी रह सकती है.

फ़िलहाल ट्रैवल करना सुगम तो नहीं है, क्योंकि बस-ट्रेन-प्लेन यात्रा सरपट नहीं हो रही. लेकिन, एक यात्री कब रुका है, उसे कौन रोक सकता है? हवाई यात्रा बहुत ज़रुरत होने पर ही की जा रही है, ट्रेन की सामान्य सारणी ठप्प है, और बसों का परिचालन बहुत अनुशासन के साथ किया जा रहा है. क्वारंटाइन नियम भी हर राज्य में अलग-अलग हैं. लेकिन एकदम से रुक-गया-सा जीवन अब धीरे-धीरे पटरी पर आ रहा है.
कहते हैं न कि डर के आगे जीत है, तो फिर आप क्या सोच रहे हैं? ट्रैवल प्लान करना शुरू करें. त्योहारों का मौसम आ रहा है. फिर फेस्टिवल सीजन लगातार बने रहने वाला है – दशहरा, दीवाली, छठ, क्रिसमस और फिर नया साल आने वाला है. सरकारों द्वारा विश्वास दिलाया जा रहा है कि उससे पहले ही कोरोना वायरस का खतरा समाप्त हो जाएगा, कोविड को मार भगाने के लिए वैक्सीन भी मिलने लगेगी. इस क्षेत्र में काफी काम भी हुए हैं.
बस आपको अपने अंदर छिपे ‘डर’ से कहना है – डियर फियर, मैं अब तुमसे नहीं डरने वाला. रोक सको तो रोक लो. ट्रैवल करना अब आसान ही नहीं होने वाला बल्कि यह तो और सुरक्षित भी बनाया जा रहा है. अब सभी पहले से कहीं ज्यादा तैयारियों के साथ खड़े हैं – होटल हो या ट्रैवल पैकेज देने वाले, हवाई अड्डा हो या गेस्ट हाउस, टैक्सी सर्विस हो या रेस्टोरेंट – हर जगह आपको बेहतर सुरक्षा दिखेगी. बस आपको अपने अंदर के डर को मारना है, क्योंकि – डर के आगे जीत है.
नए माहौल में अब तो भीड़-भाड़ भी कम ही दिखेगी. टूरिज्म हॉटस्पॉट भी ख़ासा ध्यान रखेंगे. महीनों से लोग अपनों से मिलने एक जगह से दूसरे जगह नहीं गए हैं. घूमने-फिरने नहीं निकले हैं.

तो आप अपना ट्रैवल प्लान बनाना कब शुरू कर रहे हैं? इस World Tourism Day वर्ल्ड टूरिज्म डे, वादा करें खूब ट्रैवल करेंगे, सुरक्षित यात्रा करेंगे, अपना ख्याल रखेंगे, और खर्च का भी ध्यान रखेंगे. किसी भी डर को अपने ऊपर हावी नहीं होने देंगे. आप चाहें तो उन जगहों से शुरुआत करें जहां कम लोग आते जाते हों, वे स्थान जो खूबसूरत तो हैं लेकिन उन्हें अभी तक उतना एक्स्प्लोर नहीं किया गया है.
केवल मूकदर्शक नहीं