क्या भारत में मोंसैंटो को निराशा मिलेगी?

बिहार के किसानों ने बहुराष्ट्रीय बीज कंपनी मोंसैंटो को अंगूठा दिखा दिया है. इसकी सूचना ‘जी.एम. मुक्त बिहार अभियान’ ने दी है. यह बताया गया है कि राज्य के किसानों ने अपने खेतों में मोंसैंटो को अपने बीजों का परीक्षण नहीं होने दिया है.

गौरतलब है कि गैर सरकारी संगठन ‘तारा फाउंडेशन’ के अंतर्गत ‘जी.एम. मुक्त बिहार अभियान’ चलाया जा रहा है. इसी क्रम में राष्ट्रव्यापी ‘किसान स्वराज यात्रा’ के पड़ाव भी बिहार में कई जगहों पर हुए थे.

राज्य किसान आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र नाथ वर्मा के अनुसार बिहार पहला ऐसा राज्य बना है जहां बी.टी. फसलों के व्यावसायीकरण पर रोक लगी है. उन्होंने ‘भारत बोलेगा’ को बताया कि केंद्र सरकार की जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रैजल कमिटी ने मोंसैंटो को देश में सात जगहों पर अपने बीजों के फिल्ड ट्रायल की अनुमति दी थी, जिनमें बिहार के दो जगह प्रमुख हैं – बेगुसराय और भागलपुर. “देश में प्रथम जी.एम. खाद्य फसल के रूप में बी टी बैंगन की मंजूरी केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने के उपरान्त पूरे देश में इसका विरोध हुआ और फिर बी.टी. बैंगन पर रोक लग गयी. वह रोक भी मानव शरीर पर बी.टी. फसलों से होने वाले दुष्प्रभाव के कारण लगी थी. तब पुनः बी.टी. मक्का के रूप में जी.एम. खाद्य फसल के परीक्षण की क्या आवश्यकता आ पड़ी?”

नियमों के मुताबिक, बीजों का खेतों में परीक्षण करने के पूर्व मोंसैंटो को पहले खुद को साबित करना अनिवार्य है परन्तु बिहार के किसानों में ‘जी.एम. मुक्त बिहार अभियान’ के जन-जागरण से मोंसैंटो को मुंह की खानी पड़ी है. भारत बोलेगा को पता चला है कि मोंसैंटो अपने जिन बीजों का परीक्षण करना चाहता है उसे विकसित राष्ट्र जैसे जर्मनी एवं फ़्रांस ने पहले ही ठुकरा दिया है.

इन परिस्थितियों में मोंसैंटो को बिहार में कदम रखना भारी पड़ रहा है. ‘जी.एम. मुक्त बिहार अभियान’ के अनुसार खाद्य सुरक्षा, किसान हित, पर्यावरण सुरक्षा एवं बिहार की जनता के हित को ध्यान में रखते हुए किसी भी हालत में राज्य में मोंसैंटो या किसी भी अन्य कंपनी को बी.टी. मक्का या कोई भी जी.एम. बीजों का फिल्ड ट्रायल नहीं करने दिया जायेगा.

इसके अनुसार पर्यावरण एवं मानव शरीर की सुरक्षा टॉप प्रायरिटी होनी चाहिए. जी.एम. फसलों से पर्यावरण एवं मानव शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ता है. बिहार सरकार ने बी.टी. बैगन को राज्य में प्रतिबंधित कर एक मिसाल कायम किया था.

भारतीय किसान यूनियन के बिहार राज्य के प्रांतीय अध्यक्ष रामानुज सिंह कहते हैं कि पूरे देश में ऐसे जी.एम. बीजों के परीक्षणों का भारतीय किसान यूनियन कड़ा विरोध कर रहा है.

इनका कहना है कि मोंसैंटो जैसी अमेरिका की कंपनी आज पूरे विश्व के बीजों पर अपना अधिकार जमाना चाहती है और ऐसे बीजों के लाने के बाद किसानों के परम्परागत बीज स्वतः लुप्त होते चले जायेंगे और इन कंपनियों का अधिपत्य होता चला जायेगा क्योंकि इन बीजों से पुनः बीज पैदा नहीं हो सकते हैं. नतीजतन किसानों को हर समय बाजार से इन कंपनियों का ही बीज खरीदने पर विवश होना पड़ेगा. “ऐसे बीज मानव शरीर के लिए मीठा जहर के सामान है, अतः बिहार सरकार को ऐसे परीक्षण तुरंत रोकने चाहिए जिसमें राज्य के किसानों का भला हो सके.”

बिहार के कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह का तो मानना है कि राज्य में किसानों को जैविक खेती पर ध्यान देना चाहिए और जहरीले रासायनिक खादों का भी परित्याग करना चाहिए.

भारत बोल रहा है