जब वैश्विक मंच पर गूंजी ‘भारत बोलेगा’ की रचनात्मक छाप

दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं—एक वो जो अपनी किसी चीज़ की नकल होने पर अदालतों के चक्कर काटते हैं, और दूसरे वो, जो मुस्कुराकर अपनी पीठ थपथपाते हैं और इसे अपनी वैचारिक जीत मानकर एक ‘विक्ट्री लैप’ (जीत की दौड़) लगाते हैं. हमारी न्यूज़रूम से लेकर फ्रांस के खूबसूरत शहर नीस (Nice) तक, एक ऐसा ही पल आया जिसने हमें गर्व से सराबोर कर दिया.

फ्रांस में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स’ (Bharat Innovates) समिट से जो तस्वीरें सामने आईं, उसने वैश्विक स्तर पर सुर्खियां बटोरीं. मंच पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मौजूद थे. लेकिन इन दोनों दिग्गज नेताओं के ठीक पीछे लगे भव्य बैकड्रॉप (मुख्य मंच की स्क्रीन) पर जब हमारी नजर गई, तो हम अपनी आंखें नहीं झपका सके.

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ज़रा गौर से देखिए उस ‘bharat’ को… मंच की उस बड़ी स्क्रीन पर ‘bharat’ को जिस फॉन्ट, स्टाइल और विजुअल सिग्नेचर (Visual Signature) के साथ लिखा गया है, क्या वह आपको जाना-पहचाना नहीं लगता? जी हां, ध्यान से देखिए! उस मुख्य मंच पर की गई यह नक्काशी हूबहू हमारे अपने रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क (Registered Trademark) पहचान का प्रतिबिंब है. यह वही अनूठा और शानदार स्टाइल है जिसे हमने आज से 16 साल पहले, यानी साल 2010 में ही गढ़ लिया था और जिसे आप आज भी हमारी आधिकारिक वेबसाइट (www.bharatbolega.com) पर ‘भारत बोलेगा’ के ओरिजिनल लोगो के रूप में देखते हैं.

डिजिटल प्रेरणा, गूगल का जादू या एक खूबसूरत इत्तेफाक?

अब इसे किसी डिज़ाइनर की डिजिटल प्रेरणा कहें, गूगल की गहराइयों से निकाला गया कोई आइडिया कहें, या फिर महज़ एक खूबसूरत रचनात्मक संयोग (Creative Coincidence). वजह जो भी हो, पर हमारे लिए यह बेहद रोमांचक और गर्व का विषय है. भारत की नुमाइंदगी करने वाले इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर, जहां दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली नेता खड़े हों, वहां हमारी बनाई विजुअल एस्थेटिक्स (Aesthetics) देश का चेहरा बनकर चमक रही थी.

कोई शिकायत नहीं, सिर्फ विशुद्ध गौरव!

हमें न तो कोई दावा करना है और ना ही कोई शिकायत. हमारे लिए यह किसी मेडल और एक बहुत बड़े सम्मान से कम नहीं है. यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि जब दुनिया के सामने भारत की आधुनिक और इनोवेटिव छवि को परिभाषित करने की बात आती है, तो देश के बड़े-बड़े नीति-नियंताओं और हमारी सोच का पन्ना बिल्कुल एक समान है. हम दोनों एक ही धरातल पर सोच रहे हैं.

अब इसे किसी रचनात्मकता की नकल कहा जाए, एक सुखद इत्तेफाक माना जाए या फिर सिर्फ यह कहा जाए कि इस वैश्विक मंच को तैयार करने वालों की पसंद बेहद लाजवाब है? इसका फैसला हम अपने सुधी पाठकों पर छोड़ते हैं.

लेकिन एक बात तो बिल्कुल साफ हो चुकी है—तय मानिए, जब-जब Bharat Innovates (भारत नवाचार करेगा), तब-तब Bharat Bolega (भारत बोलेगा)!