भैया, रात का खाना चाहे जितना छक कर खाया हो—दाल-चावल, चोखा-बाटी या गर्मागर्म रोटियां—जैसे ही थाली हाथ से छूटती है, दिमाग के किसी कोने से एक आवाज आती है, “अरे, कुछ मीठा हो जाता तो मजा आ जाता!” फिर पैर अपने आप फ्रिज की तरफ बढ़ जाते हैं. कभी रसगुल्ले का बचा हुआ रस, तो कभी डिब्बे में छुपी पड़ी सोनपापड़ी का टुकड़ा… कुछ भी थमा दो, इस पेटू मन को बस शांति चाहिए.

लेकिन रुकिए! क्या यह सिर्फ खाने का शौक है या कोई गहरी ‘लत’?
इस बात का पता लगाने के लिए सात समंदर पार बैठे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के बड़े-बड़े रिसर्चर भी परेशान हैं. एक इंटरव्यू में हार्वर्ड टी.एच. चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के रिसर्चर डेविड लुडविग (David Ludwig) बताते हैं, मीठे की यह तलब (Cravings) बिल्कुल असली है. जब हम चीनी (sugar) या रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट खाते हैं, तो हमारे दिमाग का वही हिस्सा चमक उठता है जो किसी लत या नशे के दौरान एक्टिव होता है.
लेकिन, क्या चीनी को शराब या सिगरेट जैसा नशा कह देना सही है?
हार्वर्ड बाबू यहां थोड़ा ‘शुगर कोट’ करते हुए राहत देते हैं. उनका कहना है कि चीनी को सीधे शराब या निकोटीन की कतार में खड़ा कर देना थोड़ी नाइंसाफी होगी. शराब या नशीली चीजें इंसान के व्यवहार को पूरी तरह बदल देती हैं और उन्हें छोड़ना शारीरिक रूप से बहुत दर्दनाक होता है, जिसे ‘विड्रॉल’ कहते हैं. चीनी के साथ ऐसा नहीं है. अगर आप दो दिन मीठा न खाएं, तो हो सकता है कि आप चिड़चिड़े हो जाएं, लेकिन आप कांपने नहीं लगेंगे.
असल में, हमारे शरीर और जीवन दोनों को थोड़े ‘मीठे’ की जरूरत होती है. समस्या चीनी नहीं है, बल्कि वह तरीका है जिससे हम इसका इस्तेमाल करते हैं. आज के समय में हर डिब्बाबंद चीज में इतनी चीनी ठूंस दी गई है कि हमारे शरीर का नेचुरल मीटर ही खराब हो गया है. अमेरिकी लोग औसतन दिनभर में 17 चम्मच चीनी डकार जाते हैं, जो कि तय लिमिट से दोगुनी है. हमारे हिंदी बेल्ट का हाल भी कोई जुदा नहीं है—चाय में तीन चम्मच चीनी और ऊपर से शाम को जलेबी!
तो फिर इस रात वाली ‘चुड़ैल’ (तलब) को कैसे भगाएं?
अगर आप भी रात के भोजन के बाद मीठे के चक्कर में अपनी सेहत का कबाड़ा कर रहे हैं, तो अब इस आदत को बाय-बाय कहने का वक्त आ गया है. रात के समय खाई गई चीनी सीधे पेट पर चर्बी बनकर बैठती है और नींद का कबाड़ा करती है सो अलग. इस क्रेविंग से लड़ने के कुछ देसी और मजेदार नुस्खे आज़माइए:
- सौंफ-मिश्री का खेल: जैसे ही मीठे की याद आए, मिश्री का एक छोटा सा दाना और खूब सारी सौंफ मुंह में दबा लीजिए. सौंफ मुंह का जायका बदल देगी और मिश्री का छोटा दाना दिमाग को बहला देगा.
- गुड़ की डली से यारी: सफेद जहर (चीनी) को छोड़कर गुड़ का एक छोटा टुकड़ा खाइए. यह पाचन भी सही करेगा और चीनी जैसी बंपर कैलोरी भी नहीं देगा.
- ब्रश करो, किस्सा खत्म: जैसे ही रात का खाना खत्म हो, तुरंत जाकर मंजन (ब्रश) कर लीजिए. पुदीने (Mint) के स्वाद के बाद कुछ भी मीठा खाने का मन नहीं करता. यह दिमाग को सिग्नल देता है कि ‘दुकान बंद हो चुकी है’.
- पानी का घूंट: कई बार शरीर पानी मांग रहा होता है और हमारा भुलक्कड़ दिमाग सोचता है कि उसे आइसक्रीम चाहिए. एक गिलास गुनगुना पानी पीजिए, तलब अपने आप शांत हो जाएगी.
तो भैया, हार्वर्ड वालों की रिसर्च अपनी जगह सही है कि चीनी शराब जितनी जानलेवा लत नहीं है, लेकिन इस ‘मीठे धोखे’ को रात के समय अपने सिर पर चढ़ाना बंद कीजिए. आज रात जब फ्रिज अपनी तरफ खींचे, तो जरा कड़ाई से बोलिएगा—“बस भाई, आज नहीं!”
केवल मूकदर्शक नहीं