शरीर में चिप डालकर गंभीर बीमारियों का इलाज

टेक कंपनियां अब आपके मस्तिष्क की विधुतीय तंरगों को हैक करने जा रही हैं. डरें नहीं, यह हैकिंग गलत मंशे से नहीं की जा रही. यह आपके बेहतर स्वास्थ्य के लिए हो रहा है.

शरीर की सारी गतिविधियां मस्तिष्क की तंरगों से संचालित होती हैं. मल्टीनेशनल फार्मा कंपनी ग्लैक्सो और टेक कंपनी अल्फाबेट (गूगल की सब्सिडियरी) का साझा उपक्रम वैरीली लाइफ साइंस उन्हीं तंरगों को हैक करने के लिए बायोइलेक्ट्रोनिक्स प्रोजेक्ट में लगे हैं.

इस प्रोजेक्ट के तहत ऐसा डिवाइस या चिप तैयार किए जाने की बात हो रही है जिसे इंसान के शरीर में डालकर उसके मस्तिष्क और स्नायु तंत्र की तरंगों को ट्रेस कर गंभीर से गंभीर बीमारी का इलाज किया जा सके.

700 मिलियन डॉलर का प्रोजेक्ट

इस साझा मेडिकल शोध के लिए बायोइलेक्ट्रोनिक्स प्रोजेक्ट में 700 मिलियन डॉलर खर्च होने हैं. ग्लैक्सो और वैरीली लाइफ साइंस कंपनियों को मिलाकर गैलवानी बायोइलेक्ट्रोनिक्स कंपनी बनाई गई है. इस कंपनी में 55 फीसदी हिस्सेदारी ग्लैक्सो की है और बाकी 45 फीसदी वैरीली लाइफ साइंस की.

health-chip-diagnosisगैलवानी बायोइलेक्ट्रोनिक्स के दो लैब में इस मेडिकल चिप को बनाने के लिए वैज्ञानिक, इंजीनियर और मेडिसिन एक्सपर्ट लगे हुए हैं. एक लैब ब्रिटेन के स्टीवेंज और दूसरा अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में है.

जबसे मानव शरीर के अंदर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस डालने की तकनीक विकसित हुई है तबसे वैज्ञानिकों ने हेल्थकेयर में क्रांतिकारी प्रयोग कर बहुत हद तक बीमारियों पर काबू पाने में कामयाबी हासिल की है, खासकर पेसमेकर. लेकिन मेडिकल साइंटिस्ट इससे आगे की सोच रहे हैं ताकि मानव शरीर की संरचना के हर कोने को वो भेद सकें और बीमारियों की तह तक जाया जा सके.

2013 से ही ग्लैक्सो है प्रयासरत

ग्लैक्सो कंपनी 2013 से ही बायोइलेक्ट्रोनिक्स प्रोजेक्ट में जुटी हुई है. इस प्रोजेक्ट के तहत बनाए जा रहे चिप का टारगेट मानव शरीर के स्नायु तंत्र पर होगा. स्नायु तंत्र रीढ़ की हड्डी से लेकर शरीर के हर अंग में फैला रहता है.

इस चिप की मदद से हाइपरटेंशन, नींद की बीमारियों समेत कई और बीमारियों के लिए जवाबदेह सिग्नल को हैक किया जा सकता है. कंपनियां इस चिप को बनाने से पहले शरीर के पूरे इलेक्ट्रिक तरंगों की सर्किट का मैप बना चुकी हैं. बायोइलेक्ट्रोनिक्स का यह अजूबा अगर कामयाब हुआ तो कई गंभीर बीमारियों की वैक्सीन और दवा बनाई जा सकती है.

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