बॉलीवुड में आत्महत्या

एक और कहानी खत्म हुई. वक़्त के रेत में एक नाम और दब गया. टीवी एक्ट्रेस प्रत्युषा बनर्जी की बेवक्त मौत ने सब को चौंका दिया. 24 वर्ष की प्रत्युषा टीवी सीरियल ‘बालिका वधू’ में आनंदी के रोल में हर एक के दिल में समा गई थीं. हाल ही में उन्होंने अपने घर के सीलिंग फैन से लटक कर अपनी जान दे दी. इस रियल लाइफ ड्रामे की असली कहानी कहने वाला अब कोई नहीं बचा. उनके साथ ही ऐसी कई कहानियां दफ्न हो गईं जिनका खुलासा नहीं हो पाया और हर मौत को आत्महत्या का नाम दे दिया गया.

मार्लिन मुनरो की मौत ने हॉलीवुड को चौंकाया था

हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री मार्लिन मुनरो की मौत 1962 में दवाओं के ओवरडोज से हुई थी, जिसे आत्महत्या करार दिया गया था. मार्लिन अपने कमरे में अधमरी पाई गई थीं. वह 36 वर्ष की थीं और बताया जाता है कि डिप्रेशन की शिकार थीं.

सिनेमा जगत का एक हमसफर डिप्रेशन भी है जो बहुत से कलाकारों से साथ चलता रहा है. सिनेमा की चकाचौंध, ग्लैमर, पैसा और शोहरत कुछ ऐसी चीज़े हैं जो हर कलाकार को चाहिए. मगर इसके लिए उनको एक भारी कीमत चुकानी पड़ती है. कभी कभी अपनी जान से हाथ भी धोना पड़ता है.

लीजेंड गुरु दत्त की मौत भी थी एक पहेली

महान अभिनेता और निर्देशक गुरु दत्त भी डिप्रेशन के शिकार थे और उन्होंने 1964 में 39 साल की उम्र में भारी मात्रा में शराब और नींद की गोलियों का सेवन किया जो उनका तीसरा सुसाइड एटेम्पट था. नींद नहीं आती थी और बीवी से विरह के गम में उन्होंने खूब पीना शुरू किया था. वैसे तो घरवाले कहते हैं कि वह एक एक्सीडेंट था.

कम उम्र में मुसीबतों और परेशानियों से हार मान जाना आम सी बात है. 27 साल के सिंगर और संगीतकार कर्ट कोबैं ने खुद को गोली मार कर हालात से समझौता किया तो आशा भोंसले की बेटी ने भी कुछ ऐसा ही किया. कहते हैं कि उनकी खराब शादी और डिप्रेशन ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया था.

कुछ यूँ हीं मर गए… 

कुछ यूँ ही मर गए और किसी को खबर न हुई कि आखिर हुआ क्या. इस लिस्ट में दिव्या भारती, मनमोहन देसाई और परवीन बॉबी जैसे कुछ कलाकार हैं जिनकी मौत की वजह सामने नहीं आई. वहीं सिल्क स्मिता, विवेका बाबाजी, जिआह खान, कुलजीत रंधावा और नफीसा जोसफ जैसे कलाकार अपने घर की छत पर पंखे से लटके हुए पाए गए. सबकी कहानी कुछ एक सी है … डिप्रेशन और नाकामयाबी के इर्द गिर्द. शायर हफीज़ मेरठी के शब्दों में … “अजीब लोग हैं क्या मुन्सफी की है, हमारे क़त्ल को कहते हैं ख़ुदकुशी की है.”

भारत बोल रहा है