क्या भारतीयों को जेन ऑस्टेन जैसा सम्मान मिलेगा?

जेन ऑस्टेन (16 दिसंबर 1775 – 18 जुलाई 1817) एक अंग्रेजी लेखिका थीं जिनका जन्म इंग्लैंड के हैम्पशायर  प्रांत में हुआ था. उनकी 200 वीं पुण्यतिथि पर 10 पाउंड के नए बैंक नोट जारी किए गए हैं, जिसमें जेन ऑस्टेन के चित्र को छापा गया है.

दरअसल अब तक इंग्लैंड की महारानी एलिज़ाबेथ (द्वितीय) ही इकलौती महिला रही थीं जिनकी छवि इंग्लैंड और वेल्स के मुद्राओं अथवा बैंक नोट्स पर अलंकृत थी.

Jane Austenक्या ऐसा भारत में संभव है? क्या हमारे उपन्यासकारों और बुद्धिजीवियों को यह सम्मान मिल सकेगा?

ऑस्टेन एक बेहतरीन उपन्यासकार थीं जिनकी रचनाओं पर आधारित अनेकों नाट्य रूपांतरण, रेडियो डॉक्यूमेंटरी, और फिल्म बन चुके हैं.

वह एक बेहद प्रतिभावान लेखिका थी, जिनकी कृतियों में दूरदर्शिता का भाव देखने को मिलता है.

प्राइड एंड प्रेजुडिस, सेंस एंड सेंसिबिलिटी, नार्देंजर ऐबी, मैन्सफील्ड पार्क, एमा और पर्सुएशन उनके लिखे छह उपन्यास हैं.

इन उपन्यासो में समाज की इस सोच पर एक तीखा व्यंग्य एवं प्रहार है कि समाज में उच्च स्तर की प्राप्ति तथा आर्थिक सुरक्षा के लिए महिलाओं को अपने पति पर निर्भर रहना पड़ेगा.

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