नेता कब होंगे रिटायर

भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष की बात सभी सोचते हैं. उस पर अमल भी करते हैं लेकिन इसे मिटाएंगे कैसे इस बारे में कोई नहीं सोचता. हमारे समाज में सबसे बडी बिडंबना यह है कि हर चौक चौराहों, घरों और सार्वजनिक स्थानों पर भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग की बात की जाती है. लेकिन कैसे समाप्त करेंगे, इस बारे मे कोई खास चर्चा नहीं होती है, और न ही इस दिशा में अमल हो पाता है. इसका सबसे बडा कारण हैं भ्रष्ट और चापलूस नेता. भ्रष्ट नेताओं ने देश और लोकतंत्र को ताक पर रख कर जिस तरह लूट खसोट का आलम मचा रखा है इसके लिए कहीं न कहीं हम स्वयं जिम्मेदार हैं.

लोकतंत्र के सभी चार स्तंभों के चपरासी से लेकर अधिकारी तक के रिटायरमेंट की व्यवस्था संविधान में है. लेकिन एक स्तंभ को चलाने वाले इन नेताओं के रिटायरमेंट की कोई व्यवस्था नहीं है. कानून बनाने वाले ये नेता जब चपरासी से अधिकारी तक को साठ साल बाद रिटायर करवा देते हैं तो ये खुद रिटायर क्यों नहीं करते हैं ! इनके लिए भी यह व्यवस्था होनी चाहिए. इन्हें भी एक निश्चित समय सीमा के बाद रिटायरमेंट लेकर युवाओं के लिए रास्ते खाली करना चाहिए.

किसी भी देश में नेता को व्हील चेयर पर नहीं देखा जाता, लेकिन भारत में ऐसा है. हमारे यहां थर्राते, कांपते और डगमगाते रहेंगे फिर भी चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहते हैं. देश के नेताओं के बीच प्रधानमंत्री बनने की होड़-सी लगी रहती है. राजनीति में आज वंशवाद का चलन है. कुछ लोगों को युवराज कहा जा रहा है, महाराज कहा जा रहा है. ये कहां के युवराज हैं, ये कहां के महाराज हैं ! यह लोकतंत्र का मजाक नहीं तो और क्या है ! राजनेताओं की विद्रूपताओं और चुनौतियों से निपटना आवश्यक है.

– अध्यक्षजी

भारत बोल रहा है