हीरो ऑफ इंडिया

मार्च 2016 के अंतिम हफ्ते में रुसी सेना के साथ एक ऐसी वारदात हुई जिससे वहां का एक सैनिक अपने देश का हीरो बन गया. उसे अमेरिका समेत पूरी दुनिया सलाम ठोक रही है. इस घटना ने अचानक 1999 के कारगिल युद्ध में शामिल भारतीय सेना के एक ऑफिसर की यादों को ताजा कर दिया.

दोनों ही घटनाओं में युद्ध कौशल एक जैसा था लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि रुस ने अपने इस हीरो को रशियन रैंबों यानि हीरो बनाकर सम्मानित किया तो भारतीय सेना के इस ऑफिसर को सेना मेडल के लायक ही समझा गया.

‘भारत बोलेगा’ देशप्रेम के जज्बे को करता है सलाम

भारत बोलेगा ने भारतीय सेना के इस ऑफिसर के उस वाकयात पर खोजबीन की और उनके शुभचिंतकों ने उस घटना को साझा किया. अनुरोध किया गया कि वह महान ऑफिसर देश के लिए काम करते हैं, नाम के लिए नहीं… लिहाजा उनका नाम नहीं प्रकाशित किया जाए. हम उनके इस देश प्रेम के जज्बे को सलाम करते हैं.

अपने साथ दुश्मनों को भी मार गिराया

आइए जानते हैं क्या था रुस और भारत के सेना अधिकारी का युद्ध कौशल और दुश्मनों को जवाब देने का तरीका. रशियन सेना के ऑफिसर लेफ्टिनेंट एलेक्जेंडर प्रोखोरेन्को सीरिया के पालमेरा में आईएस जिहादियों के बीच निहत्था घिर गए थे.

तत्काल उन्होंने फैसला लिया कि वो भले मर जाएं लेकिन वे दुश्मनों को भी मार गिराएंगे और उन्होंने तुरंत ही अपने सीनियर्स को उस लोकेशन पर एयरस्ट्राइक करने का मैसेज कर दिया. यही हुआ उन्होंने अपने साथ आईएस के कई जेहादियों को नेस्तनाबूत कर दिया.

उनकी इस बहादुरी को रुस में सर्वश्रेष्ठ बहादुरी का अवार्ड मिला. अमेरिका और नाटो ने भी उनकी बहादुरी को सलाम किया. खैर, ऐसे बहादुरी के किस्से हमारी भारतीय सेना के जवानों ने भी कम नहीं किए हैं.

कैसे कारगिल वार में पाक सेना को भारतीय सेना ने छकाया

1999 के कारगिल युद्ध में 80-100 जवानों की एक टुकड़ी अपने ऑफिसर के नेतृत्व में द्रास सेक्टर पर तैनात थी. एक रात भारतीय सेना ने योजना बनाई कि टाइगर हिल पर अटैक कर पाकिस्तान को जवाब दिया जाए.

इसके लिए उन्होंने एक गेम प्लान तैयार किया. इस गेम में द्रास सेक्टर पर तैनात जवानों की उसी टुकड़ी को पाक सेना का ध्यान बंटाने के लिए एक अलग पहाड़ की चोटी पर पहले भेजा गया. लेकिन गेम उल्टा पड़ गया.

पाकिस्तानी सैनिक उस चोटी पर पहले से वहां मौजूद थे और पाक सैनिकों ने ताबरतोड़ फायरिंग करनी शुरु कर दी. एक घंटे तक दोनों ही ओर से धुंआधार फायरिंग हुई. लेकिन उसके बाद 75 डिग्री के कोण पर फिसलन भरी बर्फ और हाड़ कंपाती ठंड के बीच उस टुकड़ी के ऑफिसर ने तत्काल जो फैसला लिया वह किसी का भी दिल दहला सकता है.

दुश्मनों को उड़ाने के लिए अपने ही ठिकाने पर कराया अटैक

पाकिस्तानी सैनिक भारतीय सैनिकों के टुकड़ी से महज 50 मीटर की दूरी पर थे. भारतीय सेना के जवान बर्फ खोद कर अंदर दब गए और उस ऑफिसर ने पीछे खड़े बोफोर्स तोप पर डटे भारतीय सेना के ऑफिसर को पाकिस्तानी सेना का लोकेशन बता उन पर आर्टिलियरी अटैक करने को कहा.

और इस तरह पाक आर्मी बेस को किया गया ध्वस्त

अगर वह ऑफिसर यह बता देता कि भारतीय सेना के 80 जवान भी उसी लोकेशन पर पाकिस्तानी सैनिक के सामने डटे हुए हैं तो शायद ही भारतीय सेना पाक सेना को खत्म करने के लिए अपने जवानों की ज़िन्दगी को दाव पर लगाती.

सच में कभी-कभी एक झूठ भी बड़ा सच साबित होता है और वही हुआ. बोफोर्स तोप से वहां आर्टिलियरी अटैक किया गया और पाकिस्तानी आर्मीबेस को ध्वस्त कर दिया गया.

यह भारतीय सेना के उस ऑफिसर के सूझबूझ की कहानी है जो अपने जवानों की ज़िन्दगी को दाव पर तो लगाया लेकिन उन्हें बिना कोई नुकसान पहुंचाए दुश्मनों को धुल चटाया. सलाम के हकदार तो दोनों हैं, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सेना की टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे ऑफिसर को अपने जीवन से ज्यादा अपने साथियों के जीवन से प्यार होता है.

भारत बोल रहा है