कौन बनेगा युवराज

भारत की 30 मई से इंग्लैंड में होने वाले विश्व कप के लिए टीम की घोषणा हो चुकी है.

इस समय बड़ा सवाल यह है कि जो काम युवराज सिंह ने 2011 में भारत को 28 साल बाद विश्व खिताब दिलाने में किया था, वही काम इस 15 सदस्यीय टीम का कोई खिलाड़ी कर पाएगा?

हर टीम में एक एक्स फैक्टर होता है. 2011 की विश्व कप टीम में युवराज सिंह टीम इंडिया का सबसे बड़ा एक्स फैक्टर थे और अब 2019 में टीम इंडिया के एक्स फैक्टर की तलाश है.

युवराज 2011 के विश्व कप में कैंसर के लक्षण होने के बावजूद मैदान में लगातार डटे रहते थे और विपक्षियों के छक्के छुड़ाते रहते थे.

युवराज ने उस विश्व कप में नौ पारियों में 90.50 के औसत और 86.19 के स्ट्राइक रेट से 362 रन बनाए थे जिसमें एक शतक और चार अर्धशतक शामिल थे.

युवराज ने नौ मैचों में 15 विकेट भी हासिल किए थे. अपने हरफनमौला प्रदर्शन की बदौलत युवराज मैन ऑफ द टूर्नामेंट बने थे.

युवराज ने इंग्लैंड के खिलाफ 58, आयरलैंड के खिलाफ नाबाद 50, हॉलैंड के खिलाफ नाबाद 51, वेस्ट इंडीज के खिलाफ 113 और गत चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सबसे महत्वपूर्ण मैच में नाबाद 57 रन बनाए थे.

2011 से पहले 1983 में भारत की खिताबी जीत में मोहिंदर अमरनाथ टीम के एक्स फैक्टर रहे थे. अमरनाथ सेमीफाइनल और फाइनल के मैन ऑफ द मैच रहे थे.

अमरनाथ की गेंद और बल्ले से कामयाबी ने भारत को खिताबी जीत दिलाई थी.

लॉर्ड्स में दो बार के चैंपियन और शक्तिशाली वेस्ट इंडीज के खिलाफ फाइनल में अमरनाथ ने 26 रन बनाने के अलावा सात ओवर में मात्र 12 रन देकर तीन विकेट हासिल किए थे.

विराट कोहली की विश्व कप टीम में अमरनाथ और युवराज जैसी भूमिका कौन खिलाड़ी निभाएगा, यह इस समय यक्ष प्रश्न है.

हार्दिक पांड्या में ऐसी भूमिका निभाने का दमखम है लेकिन विश्व कप जैसे बड़े मंच पर पहली बार खेलने जा रहे हार्दिक के लिए विश्व कप का दबाव झेलना पहले बड़ी चुनौती होगी.

हार्दिक एक दबंग खिलाड़ी हैं और युवराज जैसी दबंगई के साथ बल्लेबाजी भी करते हैं. वह मध्यम गति के तेज गेंदबाज भी हैं.

हार्दिक में लंबे छक्के मारने की क्षमता है जिसका नमूना उन्होंने आईपीएल में बार-बार दिखाया है.

टीम में विजय शंकर के रूप में एक और आलराउंडर है जिन पर चयनकर्ताओं ने काफी भरोसा दिखाया है.

हालांकि शंकर ने इस साल जनवरी से शुरू हुए अपने वनडे करियर में मात्र नौ मैच खेले हैं जिनमें वह सिर्फ दो विकेट ले पाए हैं और इन मैचों में उन्होंने 165 रन बनाए हैं.

शंकर के लिए युवराज के नक्शेकदम पर चल पाना आग के दरिया पर चलने के बराबर होगा.

टीम में केदार जाधव और रवींद्र जडेजा के रूप में दो और आलराउंडर हैं लेकिन युवराज जैसी विस्फोटक पारियां खेलना इन चारों आलराउंडर के लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं.

वर्ष 1983 में कपिल देव की कप्तानी में पहला और फिर वर्ष 2011 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में दूसरा वनडे विश्व कप जीतने वाली टीम इंडिया की नजर इस बार विराट कोहली की अगुआई में तीसरी बार खिताब जीतने पर होगी.

भारत बोल रहा है