भैया, जेठ और आषाढ़ के महीने में जब सूरज देवता सीधे सिर पर तांडव करने लगते हैं, तो ऐसा लगता है मानो आसमान से पानी नहीं, सीधे अंगारे बरस रहे हों. दोपहर में सड़क पर निकलो तो बाइक की सीट पर बैठना ऐसा लगता है जैसे जलते तवे पर पराठा सिंघा जा रहा हो. उधर घर के भीतर कूलर भी ‘गिव अप’ कर देता है और उमस वाली ऐसी हवा फेंकता है कि इंसान खौलने लगे.
भारत के मैदानी इलाकों में गर्मी और लू (Heatwave) कोई नई बात नहीं है, लेकिन अब यह समस्या पूरी दुनिया में महामारी की तरह फैल रही है. इसी को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र (UN-Habitat) ने एक गाइड जारी की है—Nine ways to stay cool during a heatwave (यानी लू के दौरान खुद को ठंडा रखने के 9 अचूक तरीके).

अब UN बाबू ने तो यह तरीके ग्लोबल ऑडियंस के लिए लिखे हैं, लेकिन हमने सोचा कि क्यों न इसे अपने हिंदी बेल्ट के भैया-बहनों के लिए जरा ‘शुगर कोट’ करके और देसी तड़का मारकर समझाया जाए. तो आइए जानते हैं कि इस भीषण गर्मी में खुद को ‘कूल’ कैसे रखना है:
1. पानी से यारी, सबसे भारी (Stay Hydrated)
गाइड कहती है कि प्यास लगने का इंतजार मत कीजिए. दिनभर पानी पीते रहिए. हमारे देसी स्टाइल में कहें तो—घर से जब भी निकलो, दो गिलास पानी या सत्तू का शरबत डकार के निकलो. जेब में एक छोटा प्याज रख लो (बुजुर्ग कहते हैं लू नहीं लगती) और नींबू-पानी या छाछ को अपना परम मित्र बना लो.
2. सूरज चाचा से ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ (Stay Out of the Sun)
दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच जब धूप सबसे कड़क होती है, तब बहुत जरूरी न हो तो बाहर निकलने से बचें. अगर निकलना ही पड़े, तो गमछा या छाता साथ रखना न भूलें. वो जो चेहरे पर गमछा लपेटकर ‘कमांडो’ बनने वाला लुक है न, वही इस गर्मी में सबसे बेस्ट है.
3. अपने आशियाने को रखें ठंडा (Keep Your Home Cool)
दिन के समय जब बाहर गर्म हवा (लू) चल रही हो, तो खिड़की-दरवाजे बंद रखें और भारी परदे गिरा दें. रात को जब तापमान थोड़ा कम हो, तब खिड़कियां खोलें ताकि ताजी हवा आ सके. छत पर अगर चूना (White Wash) करवा लिया जाए, तो नीचे वाले कमरों का तापमान काफी कम रहता है.
4. ढीले-ढाले कपड़ों का जलवा (Wear Loose, Light Clothing)
गर्मी में ‘टाइट-फिटिंग’ वाले हीरो बनने की कोशिश भारी पड़ सकती है. UN की रिपोर्ट भी कहती है कि हल्के रंग के और सूती (Cotton) कपड़े पहनें. ढीले-ढाले कुर्ते-पायजामे या सूती साड़ियों से बढ़कर इस मौसम में कोई लक्जरी नहीं है.
5. भारी खाने को कहें ‘नो’, हल्के को ‘यस’ (Eat Light Meals)
दुपहरिया में दबाकर मटन-चिकन या कड़ाही पनीर खाएंगे, तो शरीर उसे पचाने में ही इतनी एनर्जी खर्च कर देगा कि आपको अंदर से और गर्मी लगेगी. तरबूज, खरबूजा, खीरा और ककड़ी खाइए—ये पेट भी भरेंगे और शरीर में पानी का मीटर भी डाउन नहीं होने देंगे.

6. बिजली के उपकरणों से थोड़ी दूरी (Minimize Heat Sources)
घर के भीतर जो बड़े-बड़े बल्ब या इलेक्ट्रॉनिक सामान फालतू चल रहे होते हैं, वो भी गर्मी पैदा करते हैं. जब जरूरत न हो, तो टीवी, कंप्यूटर और फालतू लाइटें बंद रखें.
7. ‘कूलिंग सेंटर’ या पेड़ों की शरण में जाएं (Seek Cooler Public Spaces)
अगर आपके घर में बिजली कट गई है या कूलर काम नहीं कर रहा, तो किसी नजदीकी पार्क में बड़े और घने पेड़ों की छांव में बैठ जाएं. पेड़ के नीचे की हवा एसी से ज्यादा सुकून देती है.
8. कमजोरों और बुजुर्गों का रखें ख्याल (Check on Vulnerable People)
गर्मी का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर पड़ता है. अपने आस-पड़ोस में बुजुर्गों का हाल-चाल लेते रहें कि उनके पास पानी और हवा का सही इंतजाम है या नहीं.
9. जानवरों और पक्षियों के लिए ‘पुण्य’ का काम (Don’t Forget Wildlife & Pets)
इंसान तो बोलकर पानी मांग लेगा, लेकिन वो बेजुबान कहां जाएंगे? अपने घर की छत पर, मुंडेर पर या बालकनी में एक मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर जरूर रखें. गाय और बाहर घुमते कुत्तों-बिल्लिओं के लिए भी घर के बाहर पानी का इंतजाम करें.
तो भैया, UN-Habitat की यह गाइड हमें यही समझाती है कि क्लाइमेट चेंज के इस दौर में गर्मी से लड़ना नहीं, बल्कि समझदारी से खुद को बचाना है. सरकारें जब तक बड़े कदम उठाएंगी, तब तक हमें अपने स्तर पर ये छोटे-छोटे देसी और वैज्ञानिक उपाय अपनाने होंगे. तो आज ही से गमछा तैयार रखिए, पानी की बोतल साथ रखिए और इस धूप को मात दीजिए!
जानकारी भी समझदारी भी