कैसे करें सुबह की शुरुआत?

एप्पल कंपनी के सीईओ टिम कुक सुबह चार बजे ही उठ जाते हैं. क्या इसलिए वह सर्वाधिक वेतन पाने वाले सीईओ की सूची में पहले पायदान पर हैं? कौन जाने? वह तो सुबह-सुबह ही अपने मेल पढ़कर निपटा देते हैं.

मुझे जब यह जानकारी मिली तो सोचा कि वेतन पाने के लिए कोई कैसे इतनी सुबह उठ सकता है. फिर कुछ रिसर्च से पता चला कि कुछ लोग सुबह-सुबह दूसरी भाषा सीखने भी चल पड़ते हैं. कुछ अपनी किताब लिखने बैठ जाते हैं.

आखिर सूरज से पहले कैसे उठा जा सकता है? चाहे आप कितनी ही जल्दी सो जाएं, अगली सुबह नींद तो अपने टाइम से ही टूटेगी न. और फिर अलसाए रहने का रोमांच भला सुबह उठने वाले क्या जानें?

एक सज्जन हैं जो सुबह जिम में जाकर वर्ज़िश करते हैं तो दूसरे काम पर जाने की तैयारी, ताकि ट्रैफिक से बचा जा सके. एक और हैं जो ऑफ़िस जल्द पहुंचकर पास बने पार्क में टहलते हैं, तो दूसरे अपने ज़रूरी काम बिना किसी ख़लल के निपटाना पसंद करते हैं, और इसके लिए अंधेरे में ही वो अपना दिन शुरू कर देते हैं.

मुझे सुबह उठना बिलकुल पसंद नहीं था. लेकिन इन कहानियों को जानने के बाद मैं भी सुबह-सुबह उठने लगा हूँ. कभी-कभी तो फोन में अलार्म बजने से पहले ही नींद टूट चुकी होती है. कहते हैं, दिन कब शुरू करना है ये आप पर निर्भर करता है.

लेकिन, मेरे तड़के सुबह उठने के पीछे एक अनोखी कहानी है. मेरी पत्नी को सुबह-सुबह स्कूल जाना होता है. उनका कोई ड्राईवर नहीं है, और वह फिलहाल खुद ड्राइव करना नहीं चाहतीं.

उन्हें सुबह-सुबह मैं ही स्कूल छोड़ता हूँ. वापस घर आकर दोबारा अपने ऑफिस जाने में बहुत समय व्यर्थ होगा, इसलिए उन्हें स्कूल छोड़ते हुए मैं अपने ऑफिस भी सुबह जल्दी ही पहुंच जाता हूँ. वापसी में वह कभी टैक्सी, कभी ऑटो से घर आ जाती हैं.

एक सुबह गाड़ी चलाते हुए मुझे लगा कि वह मुझे बड़े गौर से देख रही हैं. मैं उनकी ओर देखते हुए मुस्कुराया, तो वह बोल पड़ीं – “तुम मेरे लिए कितना कुछ करते हो… सुबह जल्दी निकलकर पूरा दिन काम करते हो, फिर लौटने में देर हो जाती है…और फिर सुबह-सुबह…”

जवाब में मुस्कुराते हुए मैंने कहा, “मान लो तुम मेरी मंगेतर होती. फिर तो तुम्हारे साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने के लिए मैं इससे कहीं ज्यादा करता. तुम्हें वापस घर भी छोड़ने जाता.” इतना कहना था कि हम खूब हंसे.

अहम बात ये है कि हम अपनी ज़िन्दगी में कई अनोखे बंधनों में बंधे होते हैं. ये बंधन मीठे होते हैं. आप अपने रूटीन में थोड़ा बदलाव करके एक दूसरे के लिए समय निकाल ही सकते हैं, चाहे इसके लिए आपको सुबह थोड़ा जल्दी उठना पड़े या जल्दी ऑफिस पहुंचना पड़े.

भारत बोल रहा है