कैसे करें पूजा प्रार्थना?

प्रार्थना आत्मिक साधना है जो कठोर ह्रदय को भी परिवर्तित कर देता है. प्रार्थना का अर्थ परमेश्वर से जुड़ना है. हम जितना परमेश्वर के नजदीक जाएंगे वो हमें उतनी आशीष देगा. इसलिए हमें नित्य प्रार्थना करनी चाहिए.

आप कह सकते हैं – प्रार्थना में कोई शक्ति है या केवल आत्मसंतोष के लिए की जाती है. इसलिए यह बताना उचित है कि क्रिया और प्रतिक्रिया सृष्टि का नियम है, और प्रार्थना में अपार शक्ति है.

प्रार्थना नित्य क्यों करें? यह पहला प्रश्न हो सकता है. दूसरा प्रश्न – प्रमाण क्या है? क्या फायदा मिलेगा? तीसरा प्रश्न – किस तरह कब और क्या प्रार्थना करें?

प्रार्थना समझने और जानने की चीज नहीं है, यह आत्मा की शक्तियों को जगाने का एक माध्यम है. अंतिम सत्य तो केवल यही है कि ईश्वर हमारे अंदर ही है. प्रार्थना एक योग है जिसका उद्देश्य अपने को ईश्वरीय शक्ति के साथ जोड़ना है.

प्रार्थना का शाब्दिक अर्थ है विशेष अनुग्रह की चाह. प्रार्थना के समय व्यक्ति अपने इष्ट के सम्मुख जब निवेदन करता है, तो व्यक्ति का मन निर्मल होता है.

नित्य की जाने वाली प्रार्थना से हमारा मस्तिष्क स्वच्छ विचारों को धारण कर स्वस्थ बनता है तथा हमारे मनोविकार नष्ट होते हैं.

वास्तव में प्रार्थना हमें विनम्र बनाती है, जो कि मनुष्य के स्वभाव की आवश्यकता है.

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