बाघ की खाल में राम रहीम जैसे भेड़िये

गुरमीत राम रहीम को दिए गए 20 साल की जेल से एक बार फिर साबित हो गया कि भारत सच में एक अद्भुत राष्ट्र है जहां एक ओर मनचले और तनचले बाबाओं की लंबी फेहरिश्त है तो दूसरी ओर इस फेहरिस्त में हत्यारे, भ्रष्ट और व्यापारियों की लंबी कतार.

धर्म चाहे जो भी हो, यह व्यापार का एक ऐसा साधन बन चुका है जिसने धर्मगुरुओं की परिभाषा बदल डाली है. इनके मठ में दुनिया के सारे कुकर्म हो रहे हैं फिर भी लोग अंध-भक्त बनकर समाज को तबाह कर रहे हैं.

इनके पास धन और बल का अटूट और अकूत संचय होता है और यहीं से आरंभ होती है राजनीति और ढोंगी बाबाओं की सांठ-गांठ जिसका उपयोग चुनाव जीतने और सत्ता के खेल में होता है.

Gurmit Ram Rahim Insan

इन धर्मगुरुओं को राजनेता और कार्यपालिका दोनों का प्रश्रय मिलता है जो इन्हें समाज में अतिशय ताकतवर बना देता है. 

गुरमीत राम रहीम की गिरफ्तारी और जेल के बाद डेरा सच्चा सौदा के उनके साम्राज्य के संबंध में जो कुछ भी सामने आ रहा है उससे लग रहा है जैसे वह सरकार के नाक के नीचे एक सामानांतर सरकार चला रहे थे जिसमें संसद भी वही, पुलिस भी वही और अदालत भी वही थे.

डेरा सच्चा सौदा के गुरमीत राम रहीम को बलात्कार के आरोप में सजा मिलने के बाद समाज और सरकार दोनों को चौकन्ना रहने की जरूरत है क्योंकि इससे पहले भी पंजाब में भिंडरांवाले जैसे गुरू सरकार के लिए खतरा बन चुके हैं

साल 2014 में स्वयंभू संत रामपाल को अदालत के आदेश पर गिरफ्तार करने हेतु किस कदर पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी थी, शायद देश की जनता लगभग भूल चुकी होगी.

रोहतक स्थित आश्रम से एक बड़ी हिंसक झड़प के पश्चात पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था जिस कार्रवाई में छह लोग मारे गए थे और लगभग 200 लोग घायल हो गए थे.

आसाराम बापू सितंबर 2013 से अब भी जेल में हैं और उनके समर्थकों की धमकियां गाहे-बगाहे मीडिया में प्रसारित होती रही हैं. सत्य साईं बाबा के ऊपर भी यौन शोषण के संगीन आरोप लगे.

यह दिलचस्प है कि गुरमीत राम रहीम हों या अन्य कोई धार्मिक नेता, उनके जेल में रहने के बावजूद उनके भक्तों के मन में उनके लिए उतनी ही आस्था बनी रहती है 

स्वामी नित्यानंद एक अभिनेत्री के साथ सेक्स-स्कैंडल में चर्चित रहे. चंद्रास्वामी को भी धोखाधड़ी के मामले में जेल की सजा हुई थी. राधे मां दहेज और जबरन उगाही को लेकर चर्चा में रहीं जिनके खिलाफ जांच जारी है.

निर्मल बाबा के तो क्या कहने, उनपर भी धांधली और धोखेबाजी के आरोप लगे. कांची शंकराचार्य (जयेंद्र सरस्वती) पर मंदिर के मैनेजर के मर्डर केस के आरोप लगे.

बाबा रामदेव के ऊपर भी कई बार कई तरह के आरोप लगे, श्री श्री रवि शंकर के ऊपर भी आरोप लगे. इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाईक पर तो आतंक फैलाने और उसमें सहयोग के आरोप लगे.

यह आश्चर्यजनक है कि इन सभी व्यक्तियों को उनके अनुयायी चमत्कारी पुरुष मानते रहे हैं.

इन सब घटनाओं ने एक यक्ष प्रश्न खड़ा कर दिया है. ढोंगी बाबाओं के अतिशय ताकतवर बन जाने के पीछे कौन-कौन से कारक काम करते हैं जिसके परिणामस्वरूप धर्म, सियासत, प्रशासन और समाज को ये अपना गुलाम बना लेते हैं?

राज्य की शक्ति इतनी व्यापक होती है कि इसपर नियंत्रन अविलंब किया जा सकता है परंतु जनता के रक्षक वेश बदलकर भक्षक की भूमिका में उनकी अशिक्षा और अपरिपक्वता का फायदा उठाते रहते हैं.

क्या भारत बोलेगा कि, क्यों धर्म गुरुओं को ईश्वर का दूत बताया जाता है और उनकी पूजा की जाती है?

सब सत्ता का खेल है जिसमें धर्म की आड़ में धन और बल का जुगाड़ बैठाया जाता है. साथ ही धर्मगुरु के अनुयायी एक वोट-बैंक के रूप में इन गुरुओं के माध्यम से नेताओं के काम आते हैं.

इस बाबत गुरमीत राम रहीम अंतिम धर्म-गुरु नहीं हैं जिन्हें सलाखों के पीछे भेजा गया है. हमारे धर्मांध समाज में कई अब भी छुपे हैं और कई ने अपनी वैद्यता भी इस कदर बना ली है कि उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता.

कुछ तो स्वयं को किंग-मेकर की भूमिका में पेश करते हैं. बहरहाल इस बार लोगों का न्यायपालिका पर विश्वास कायम हुआ है. राजनेता एक बार फिर से शक और संदेह के घेरे में आ गए हैं. जरूरत से ज्यादा पाखंड और अंधविश्वास को खदेड़ना होगा, खासकर महिलाओं को जो इन बाबाओं के चंगुल में अनायास फंस जाती हैं.

चित्रण: अबीरा बंदोपाध्याय

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